हिमाचल में विधायकों के वेतन बृद्धि पर समाज में उबाल, 68 में से 65 विधायक करोड़ पति हैं लेकिन जरूरत सबको है,किसी समय विधायक का वेतन 500रू था लेकिन तब भी लोगों को 500₹ अधिक लगता था,आज लगभग 3:50 लाख मिलेगा,जब 500 था तब अधिक था या आज वेतन भत्ते मिलाकर 3:50 हे तो ठीक कब था ,यह ठीक है कि किसी समय विधायक बसों में सफर करते थे,यहां तक कि तत्कालीन मुख्य मंत्री डाक्टर परमार भी बसों में सफर करते थे लेकिन आज के समय में मुख्य मंत्री,मत्री ,विधायकों का बस में सफर करना एक अजूबा ही लगता है,समय परिवर्तन सील है उसके साथ कई चीजें बदलती हैं 1948 में जब हिमाचल बना था तो वे परिस्थियां कुछ और थी आज हिमाचल को बने हुए 77 साल हो गए हैं तो हालत कुछ और हैं,उस समय प्रदेश को विकसित करने का संकल्प था लेकिन आज सरकार का लक्ष्य ॠण लेकर घी पीने बन गया है.
हिमाचल प्रदेश इस समय #गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है,एक नागरिक पर 1:50 लाख का कर्ज है,कर्ज की सीमा कभी समाप्त नहीं होगी.और यह सिलसिला कहां तक जायेगा कहना कठिन है.
अभी हाल ही में मुख्य मंत्री,मंत्रीगण, विधायकों के वेतन भत्ते बढान गये हैं चारों ओर हो हल्ला और व्यंगात्मक टिप्पणियां देखने को मिल रही हैं लेकिन यह सिलसिला समाप्त नहीं होगा चलता ही रहेगा.
किसी समय विधायक का वेतन 500₹ प्रति माह होता था लेकिन उस समय लोग 500₹ को अधिक बताते थे उस समय विधायक को कार का सफल कर टी एम लेने का अधिकार नहीं था यहां तक कि तत्कालीन मुख्य मंत्री डाक्टर यशवंत सिंह परमार जी भी बसों में सफर करते थे लेकिन आज के भागमभाग के जमाने यस संभव नहीं है.विधायकों को उन्हें सरकारी बस का फ्री पास मिलता था लेकिन आज कोई विधायक, मंत्री सरकारी बस में सफर करे नहीं यह संभव नहीं है,व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है,पब्लिक थोडे दिन शोर मचायेगी उसके बाद वह भी चुपचाप देखती रहेगी क्योंकि बोलने की भी एक सीमा होती है.समय परिवर्तन सील है इसलिए सभी को यह स्वीकार करना चाहिए.
गणेश दत्त.
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