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हिमाचल विधान सभा में आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र गंभीर बिमारी को पकड़ने की जगह समिति ने रोटी गिनने का कार्य कर दिया, फिजूल खर्ची पर भी चर्चा जरूरी है लेकिन यह एक सरकार के कार्यकाल के बजाय कम से कम तीन चार कार्यकालों पर आधारित होनी चाहिए थी और वित्तीय संकट कहां से शुरू हुआ उसका कारण क्या रहा उसे कैसे दुरस्त किया जा सकता है,कहां कहां खर्च में कटौती की जानी चाहिए आदि आदि लेकिन समिति ने टैन्टों के खर्चे ,रोटी के खर्चो को उजागर कर कुछ दिनों के लिए राननीति की खुराक अवश्य पैदा कर दी है लेकिन जब मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर ने सत्ता संभाली थी तो उस समय प्रदेश के ऊपर कितना कर्ज था, उसके बाद पूर्व सरकार की देनदारी -किस्तें- व्याज सभी चीजों का वर्णन आना चाहिए था लेकिन आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र और चार्जशीट पक्ष विपक्ष का एक रिवाज ही बन गया है,वास्तव में बिमारी कुछ और है और हम ईलाज कुछ और कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश विधान सभा में प्रस्तुत श्वेत पत्र बिमारी कुछ और है और ईलाज किसी और बिमारी का हो रहा है।श्वेत पत्र लाते समय हमें बिमारी की तह में जाना चाहिए ताकि उसका ठीक प्रकार से ईलाज हो सके लेकिन ऐसा होने के बजाय श्वेत पत्र एक राजनीतिक खुराक मात्र बन कर रह गया है।

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक स्थिति का वर्णन करना या पूर्व सरकार के खिलाफ चार्जशीट लाना एक रिवाज सा बन गया है जिसका इस्तेमाल केवल राजनीतिक रोटी सेंकने के अतिरिक्त कुछ और नहीं रहता है।

गणेश दत्त।

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