पंचायत चुनाव पार्टियों की परीक्षा,भाजपा पैनल बनायेगी,कांग्रेस ने खुली छूट दे दी है,चेहरे पहचाने जा सकते हैं नगर-निगम नगर परिषद और नगर पंचायत में तो सभी को पता चलता है कि कौन किस दल से है फिर चुनाव चिह्न से दूरी कयों है?यह ठीक है कि पंचायत प्रधान उप प्रधान पंचों को स्वतन्त्र ही रहने देना चाहिए, कांग्रेस सत्ता में है वह दबाव बनाकर अपने उम्मीदवारों को वन टू वन बनाये रखने के लिए कहेगी,बेशक वह कह रही है है कि हमने सभी से चुनाव लड़ने के लिए कह दिया है,भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवारों संख्या को लेकर जरूर चिंतित हो सकती है कयोंकि सत्ता विरोधी लहर के कारण भारतीय जनता पार्टी के जीतने के चाॅस अधिक हैं,और उम्मीदवारों की भीड़ भी अधिक है खासकर जिलापरिषद सीटों पर संघर्ष अधिक दिखाई दे रहा है।
हिमाचल प्रदेश में नगर-निगम-नगरपरिषद -नगर पंचायत के चुनाव 17 मई को होंगे,इस आसय की घोषणा राज्य चुनाव आयोग ने कर दी है,पंचायत व जिलापरिषद के चुनाव की तारीखों का ऐलान किसी भी समय संभव है।
भारतीय जनता पार्टी ने बकायदा पैनल के माध्यम से उम्मीदवार तय करने का फैसला कर लिया है,लेकिन कांग्रेस पार्टी अपने पार्टी के कैडर को खुला छोड़ेगी,जो जीता। हमारा जो हारा तुम्हारा वाली नीति पर चलेगी।
भारतीय जनता पार्टी में चुनाव लड़ने वालों की भीड़ अधिक दिखाई देती है,उसका कारण सुक्खू सरकार के खिलाफ व्यापक रोष के कारण सत्ता विरोधी वोट हासिल करने की होड़ सी लगी है,लेकिन वन टू वन उम्मीदवार तय करने में भाजपा कहां तक सफल होती है यह देखना होगा,यदि वन टू वन नहीं हुआ और अपनों के बीच मतविभाजन हुआ तो भाजपा के अरमानों में पानी फिर सकता है,इसलिए नेतृत्व की और कैडर की परीक्षा होगी कि पार्टी अपने उम्मीदवार तय करते समय कार्यकर्ताओं को कैसे समझा बुझा कर मैदान में उतारती है।
गणेश दत्त।
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