प्रदेश
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अंग्रेजी नववर्ष की अंधी दौड़ में भागते सैलानी,सड़कों में जाम हो गया आम,गाड़ियों में छलक रहे हैं जाम,प्रशासन उनकी आवाभक्ति में बहुत व्यस्त है,होटलों में टूरिस्टों का जमवाड़ा,हुड़दंगबाजी से आम लोगों का जीना मुहाल,हम कहां जा रहे हैं सरकारी कलैंडर इयर को नववर्ष मान बैठे हैं।
हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में अंग्रेजी नववर्ष बनाने वालों का तांता लगना शुरु हो गया है,सड़कें फुल होटल फुल और…
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हिमाचल में चिट्टा “राक्षस रक्तबीज” बन गया है,जितना पकड़ो उतना ही पैदा हो रहा है,आये दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं,कई लोगों ने इसे अपना रोज़गार बना दिया है और कई लोगों ने इसे नेटवर्किंग के जरिये अपना व्यापार बना डाला है,सरकार का अमला चिट्टा उन्मूलन में लगा तो हुआ है लेकिन इसे समाप्त करना अब मुश्किल सा लगता है,एक जानकारी के अनुसार सरकार के 65 अधिकारी और 20 से अधिक पुलिस वाले अभी तक पकड़े जा चुके हैं ,बाढ़ ही खेत को खाये तो उसे कौन बचाये।
हिमाचल में चिट्टे का सामराज्य रक्तबीज राक्षस की तरह रोज पैदा हो रहा है,सरकार का अमला प्रयत्नशील तो है लेकिन…
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हिमाचल सरकार का धारा 118 में प्रस्तावित संशोधन केवल बड़े बिल्डरों,भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने वाला है,हिमाचल के मूल गैरकृषकों को अभी भी दोनंबर का नागरिक बनकर रहना होगा,आवश्यकता तो इस बात की थी कि हिमाचल के मूलनिवासी जिसके पास कृषि योग्य भूमि नहीं है और 1972 में भूमिसुधार कानून बनाते समय उनके अधिकार सुरक्षित नहीं रखे गये थे,जबकि कोई भी नया कानून बनता है तो पूर्व के भारत के नागरिकों के अधिकार सुनिश्चित किये जाते हैं उस समय हिमाचल के गैर कृषक मूल निवासियों के अधिकार सुनिश्चि नहीं किये गये थे जिसके कारण हिमाचल के गैर कृषक नागरिकों को लगातार कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं,सरकार ने अभी जो स॔शोधन किया है उसमें हिमाचलियों की सोसाइटीज को 118 के दायरे से बाहर रखा गया है यह भी बहुत गलत निर्णय है कयोंकि बहुत से गैर कृषक सोसाइटी के मेम्बर हैं लेकिन नये स॔शोधन से वे भी कृषक की क्षेणी में आ जायेंगे,कयोंकि धारा 118 की मूल भावना कृषक और गैर कृषक में परिभाषित की गई है न कि हिमाचली और गैर हिमाचली,हिमाचली सर्टिफिकेट बना के लोग सोसाईटी के सदस्य बन जायेंगे और वे बिना सरकार की अनुमति से मनचाही जमीन खरीद लेंगे,और गैर कृषक हिमाचली हिमाचल को बिकता देखते रहेंगे।
धारा 118 में किया गया स॔शोधन बिल्डरों और भू माफियाओं को लाभ पहुचाने वाला है और दलालों को फायदा पहुंचाने…
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धर्मशाला और मण्डी भाजपा कांग्रेस के रणक्षेत्र बने,भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के तीन साल के कुशासन,भाई भतीजावाद,भ्रटाचार पर 4 दिस॔म्बर को धर्मशाला में एक विशाल प्रदर्शन करने जा रही है,वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकाल के 3 साल का जश्न म॔डी में मनाने जा रही है, इस समय धर्मशाला में विधान सभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है,विपक्षी भाजपा सुक्खू सरकार की नाकामियों को भुनाने के लिये एक विशाल रैली करने जा रही है,हालांकि विधान सभा चुनाव के दो वर्ष का कार्यकाल अभी बाकी है लेकिन राजनैतिक पार्टियां जनता को आकर्षित करने के लिये ऐसे आयोजन करती रहती है,कांग्रेस सरकार भी 11 दिस॔बर को अपनी सरकार की तीन साल की कारगुजारी को जनता के समक्ष रखेगी।नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने म॔डी में कार्यक्रम करने पर सुक्खू सरकार को कटघरे में खड़ा किया है,जयराम ठाकुर का कहना है प्राकृतिक आपदा के गहरे घाव झेल रही म॔डी जिला की जनता के घावों पर यह नमक छिड़कने जैसा जश्न है।
हिमाचल प्रदेश की सत्तारूढ़ व विपक्षी भाजपा ने एक दूसरे को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है।4 दिस॔बर को…
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ब॔गाल ममता की बौखलाहट के पीछे SIR नहीं दीवार पर लिखी हार विदाई दिख रही है,ममता दीदी बोलती है मुझे परेशान किया तो पूरे भारत को हिला दूंगी उसके पास हिलाने वाली भूचाल की कौनसी शक्ति है ?लगता है अबकी बार अंतिम बार खेला होगा,कह रही है SIR फार्म नहीं भरूंगी,फार्म नहीं भरेगी तो चुनाव कैसे लेड़ेगी?चुनाव से भागने का बहाना तो नहीं ढ़ूढ रही है?
ब॔गाल के चुनाव आते आते वहां की मुख्यम॔त्री ममता बैनर्जी की फौखलाहट भी चरम पर पहुंच गई है,ममता को लगता…
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पंजाब पुनर्गठन आयोग के अनुसार चंडीगढ़ में हिमाचल का 7,19%हिस्सा मिलना आवश्यक है लेकिन यह मुद्दा वर्षों से लटका हुआ है,सर्वोच्च न्यायालय ने भी निर्णय दिया था कि हिमाचल का 7,19% हिस्से के ऐवज में उसे लगभग 4 हज़ार करोड़ की राशि दी जाय,यह राशि पंजाब और हरियाणा सरकार अदा करें लेकिन अभी तक मामला लटका हुआ है,जब भी उत्तर क्षेत्र विकास परिषद की बैठक होती है तो प्रदेश के मुख्य म॔त्री इस विषय को उठाते हैं लेकिन हल कोई नहीं निकलता,हिमाचल सरकार फिर से सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस विषय को पुन: कयों नहीं उठाती?यह सोचनीय विषय है।मुख्य म॔त्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कल फिर इस विषय को केंद्रीय गृह मत्री के समक्ष उठाया है,अब इस विषय को सर्वोच्च न्यायालय के पास ले जाने की आवश्यकता है।
पंजाब पुनर्गठन आयोग के निर्देश के अनुसार चंडीगढ़ में हिमाचल को मिलने वाला 7:19% हिस्सा कयों नहीं मिल रहा है…
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चुनावी गणित बताने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी का गणित क्या है?प्रशांत किशोर ने 243 सीटों वाले बिहार में 116 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे है, उनमें से कितने जीतेंगे और कितने दूसरी पार्टियों को नुकसान पहुंचायेंगे यह 14 नवंबर को ही पता चलेगा,प्रशांत किशोर के बारे में बिहार में बड़ी उत्सुकता थी लेकिन, जनसुराज पार्टी के मात्र 116 उम्मीदवार खड़े करने के बाद अब लोग कह रहे हैं कि क्या प्रशांत किशोर किंग्स मेकर बनेंगे या वोट काटू साबित होंगे।
बिहार चुनाव में सभी पार्टियों ने अपना अपना जोर लगा दिया है,परम्परागत पार्टियों से हटकर इस बार प्रशांत किशोर की…
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हिमाचल के मुख्य म॔त्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि धारा 118 का सरलीकरण किया जायेगा,अच्छी बात है इसका सरलीकरण प्रदेश के आम नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए बहुत आवश्यक है,लेकिन धारा 118 भाजपा और कांग्रेस के लिए एक फुटबाल बन चुकी है जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तो श्री जयराम ठाकुर ने भी कहा था कि इसका सरलीकरण होगा,कांग्रेस का तीखा बयान आया हिमाचल आन सेल्स, अब सुखविंदर सिंह सुख्खू का बयान आया है तो भाजपा ने भी हिमाचल सेल्स कह कर मुद्दे को हवा दी है,वास्तव में कोई भी पार्टी इसकी जड़ तक नहीं जा रही है कि वास्तव में धारा 118 में कितनी कठिनाई है और हिमाचल के मूल नागरिक भी 118 के कारण कितने परेशान हैं,इसमें हिमाचली गैर हिमाचली का विषय नहीं है इस कानून में कृषक और गैर कृषक से संबंधित कानून है,इसमें सबसे बड़ी खामी यह है कि जब 1972 में धारा 118 में संशोधन हुआ तो उस समय हिमाचल के मूल निवासी जो गैर कृषक हैं उनके अधिकारों को सुनिश्चित नहीं किया गया और उनके अधिकार सुरक्षित नहीं रखे गए, जिसके कारण यह कानून गैर कृषक हिमाचलियों के लिए अभिषाप बन गया।
>हिमाचल प्रदेश में कृषि एवं भूसुधार कानून का सरलीकरण करने की चर्चा है।मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है…
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हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव को लेकर असमंजस कयों,अभी तक रोस्टर न बनाने जाने पर भ्रम की स्स्थिति बनी हुई है,हिमाचल का चुनाव आयोग रोस्टर न बनाने पर सरकार से पूछताछ करेगा या पुराने रोस्टर पर चुनाव कराने का आदेश देगा,हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त हो रहा है,भारत के संविधान संशोधन के अनुसार निर्धारित सीमा के अंदर चुनाव कराना आवश्यक होता है लेकिन सरका,प्राकृतिक आपदा का बहाना बनाकर चुनाव टालना चाहती है लेकिन यह स॔भव नहीं होगा।
हिमाचल प्रदेश के पंचायतीराज स॔स्थाओं के चुनाओं को लेकर असमंजस की स्थिति साफ होनी चाहिए।यद्यपि चुनाव में अभी दो महाने…
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हिमाचल में मुख्य मत्री,मत्रियों विधायकों के वेतन भत्तों में अप्रत्याशित बृद्धि ,जनता में भारी रोष ,सोशल साइट्स पर वेतन भत्तों की बृद्धि पर तीखे व्यंग्य कसे जा रहे हैं ,हिमाचल प्रदेश घनघोर आर्थिक संकट के दौर से गुज़र रहा है,प्राकृतिक आपदा ने प्रदेश को बदहाल कर दिया है,अब एक विधायक का वेतन और भत्ते मिलाकर 3 लाख से अधिक हो गया है,म॔त्रियों ,मुख्य मत्री का वेतन भत्ते मिलाकर 4 लाख के करीब हो गया है ,हैरान-परेशान करने वाली बात यह है कि सरकार कर्मचारियों की पैंशन और देय भत्ते आर्थिक संकट के कारण लगाकर लटका रही है लेकिन अपने वेतन भत्ते बढ़ाकर जले में नमक छिड़कने का कार्य कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में विधायकों मत्रियों मुख्य म॔त्री के वेतन भत्तों में अप्रत्याशित बृद्धि आम जनता में भारी रोष। लोक कह…
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