बिजनेस
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पंजाब पुनर्गठन आयोग के अनुसार चंडीगढ़ में हिमाचल का 7,19%हिस्सा मिलना आवश्यक है लेकिन यह मुद्दा वर्षों से लटका हुआ है,सर्वोच्च न्यायालय ने भी निर्णय दिया था कि हिमाचल का 7,19% हिस्से के ऐवज में उसे लगभग 4 हज़ार करोड़ की राशि दी जाय,यह राशि पंजाब और हरियाणा सरकार अदा करें लेकिन अभी तक मामला लटका हुआ है,जब भी उत्तर क्षेत्र विकास परिषद की बैठक होती है तो प्रदेश के मुख्य म॔त्री इस विषय को उठाते हैं लेकिन हल कोई नहीं निकलता,हिमाचल सरकार फिर से सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस विषय को पुन: कयों नहीं उठाती?यह सोचनीय विषय है।मुख्य म॔त्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कल फिर इस विषय को केंद्रीय गृह मत्री के समक्ष उठाया है,अब इस विषय को सर्वोच्च न्यायालय के पास ले जाने की आवश्यकता है।
पंजाब पुनर्गठन आयोग के निर्देश के अनुसार चंडीगढ़ में हिमाचल को मिलने वाला 7:19% हिस्सा कयों नहीं मिल रहा है…
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हिमाचल के मुख्य म॔त्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि धारा 118 का सरलीकरण किया जायेगा,अच्छी बात है इसका सरलीकरण प्रदेश के आम नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए बहुत आवश्यक है,लेकिन धारा 118 भाजपा और कांग्रेस के लिए एक फुटबाल बन चुकी है जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तो श्री जयराम ठाकुर ने भी कहा था कि इसका सरलीकरण होगा,कांग्रेस का तीखा बयान आया हिमाचल आन सेल्स, अब सुखविंदर सिंह सुख्खू का बयान आया है तो भाजपा ने भी हिमाचल सेल्स कह कर मुद्दे को हवा दी है,वास्तव में कोई भी पार्टी इसकी जड़ तक नहीं जा रही है कि वास्तव में धारा 118 में कितनी कठिनाई है और हिमाचल के मूल नागरिक भी 118 के कारण कितने परेशान हैं,इसमें हिमाचली गैर हिमाचली का विषय नहीं है इस कानून में कृषक और गैर कृषक से संबंधित कानून है,इसमें सबसे बड़ी खामी यह है कि जब 1972 में धारा 118 में संशोधन हुआ तो उस समय हिमाचल के मूल निवासी जो गैर कृषक हैं उनके अधिकारों को सुनिश्चित नहीं किया गया और उनके अधिकार सुरक्षित नहीं रखे गए, जिसके कारण यह कानून गैर कृषक हिमाचलियों के लिए अभिषाप बन गया।
>हिमाचल प्रदेश में कृषि एवं भूसुधार कानून का सरलीकरण करने की चर्चा है।मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है…
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एकतरफ विदाई और और दूसरी तरफ स्वागत, हिमाचल में यह क्या खेल चल रहा है,आत्मसम्मान बेचने वाले सत्ता के पूत क्या हिमाचल का भला कर रहे हैं?या चांदी कूट रहे हैं यह बहुत ही चिंता का विषय है,हिमाचल के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ऐक्सटैंन्सन के बाद कल रिटायर हुए और कल ही बिजली बोर्ड के चेयरमैन बन गये,एक तरफ आदेश देने वाले पद पर थे अब आदेश लेने वाले पद पर बैठ गए, आखिर हिमाचल में यह क्या खेल चल रहा है ,ये सत्ता के पूत बिना पद के जिंदा नहीं रह सकते ?
हिमाचल प्रदेश में सत्ता के पूतों का यह कया खेल चल रहा है,मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना एक ओर रिटायर हो…
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GST के अब दो स्लैब, देश में खुशी का माहौल, प्रधान म॔त्री आदरणीय नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीन से घोषणा की थी कि दिवाली और छट को उपहार मिलेगा ,निश्चित ही जी एस टी कौंसिल ने सारे देश के लिए दो स्लैब रखे हैं जिससे मध्य व गरीब परिवारों को बहुत लाभ होगा,कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि मध्य वर्ग को 9 हजार रुपए और उच्च वर्ग को 12से 15 हजार रुपए तक की बचत होगी,हिमाचल के उद्योग म॔त्री हर्ष बर्धन चौहान का एक स्टेटमैंट आया है उन्होंन कहा है कि प्रदेश को एक हजार करोड़ का नुकसान होगा लेकिन उसका आधार नहीं बताया,उन्हें डिटेल में अपनी श॔का को जनता के समक्ष रखना चाहिए जिससे कि सारे प्रदेश को पता चल सके ,अन्यथा इसे हवाई स्टेटमैंट समझा जायेगा।
भारत सरकार द्वारा GST स्लैब बदलने से सारे देश में खुशी की लहर है,लेकिन हिमाचल सरकार में उद्योग म॔त्री हर्ष…
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अमेरिका के धौंस बम को भारत ने कई बार उसके सिर पर ही फोड़ा है ,ट्रम्प के टैरिफ को मोदी ने कूड़ेदान में डाल दिया है कुछ समय बाद ट्रम्प को होश आयेगा तो पछतायेगा,परमाणु विस्फोट के समय भी अमेरिका ने भारत पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगा दिये थे,कारगिल युद्ध के समय भी अमेरिका ने तत्कालीन प्रधान म॔त्री अटल बिहारी वाजपेई को युद्ध ब॔द कर अमेरिका आने को कहा था लेकिन अटल जी साफ कहा था कि जब तक एक एक घुसपैठिये को बाहर नहीं खदेड़कर बाहर नहीं करूंगा तब तक कहीं जाऊंगा।तब भी अमेरिका को मुंह की खानी पड़ी थी,फिर वही इतिहास दोहराया जायेगा।र
अमेरिका-भारत के संबंध अभी तनाव पूर्ण चल रहे हैं,अमेरिका के राष्ट्रपती ट्रम्प के बचकाने हरकतों के बाद उसकी चारों ओर…
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वागवानों के बगीचों से सीधे व्यापारियों के सेब खरीद पर सरकार को आपत्ति कयों है?,सरकार ने उसका कोई ठोस कारण नहीं बताया है ,आजकल यह विषय काफी विवादों मे है और सोशल मिडिया में काफी चर्चा में,सरकार की आपत्ति का कारण मार्केट फीस का नहीं आना हो सकता है अन्यथा सीधे बागवानों के बगीचों से सेब खरीद कर कोई आपत्ति का कारण नहीं हो सकता,बगीजे से ही सेब खरीद से बागवानों कई मुश्किलें समाप्त हो जायेंगी जिस में मार्केट तक पहुंचाना ,ट्रांसपोर्टेशन, कुलियेज आदि से मुक्ति मिल सकती है।
सेब सीजन से पहले सरकार ने सेब बागवानों को सीधे सेब बेचने पर आपत्ति जताई है और बागवानों के चेताया…
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नगर निगम शिमला अब अपने मूल रूप से हटकर शराब के ठेके खोलेगा और शराब बेचेगा,नगर-निगम ने एक प्रस्ताव पास कर अपनी आय बढ़ाने के लिए नई तरकीब निकाली है,ऐसा लगता है कि किसी व्यक्ति ने धर्म कर्म छोड़कर बूचड़खाना खोलने की सोची है,शिमला शहर को साफ-सफाई, शुद्ध जल,पार्किंग, सड़कों का ठीक प्रबंधन रखरखाव, आवारा कुत्तों,बंदरों के आतंक से मुक्ति और चुस्त-दुरुस्त स्टाफ की जरूरत है लेकिन नगर-निगम इन सब चीजों से हटकर अब शराब बेचेगा,जगह ढारे खड़े करेगा शहर की सुन्दरता पर ग्रहण लगायेगा,कानून व्यवस्था खराब करने का आमंत्रण देगा,यह विकृत सोच किसकी है यह ठेके खुलने के बाद ही पता चलेगा.
नगर निगम शिमला की एक विकृत सोच सामने आई है,आय बढ़ाने के लिए पूरे शहर में शराब के ठेके खोलने…
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