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हिमाचल में Additional charge की नई रीत किस बात की ओर इशारा करती है? कब मुक्ति मिलेगी अडीसन चार्ज से?परीक्षा -क्षमता या ब्लैकमेल, पिछले 3 वर्षों से हिमाचल सरकार टाॅप पोस्टों को अडीसनल चार्ज देकर अपना कार्य पूरा कर रही है,जो स्थान खाली है सबसे महत्वपूर्ण है उस पोस्ट पर अनिश्चितता के बादल छाये रहते हैं,यह सरकार की क्या रणनीति होगी ?इस पर सभी का द्रष्टि जा रही है,सुक्खू सरकार ने मुख्य सचिव अतिरिक्त चार्ज, पुलिस महानिदेशक अतिरिक्त चार्ज, अब कृषि विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर का अतिरिक्त चार्ज आखिर कयों? निवर्तमान मुख्य सचिव संजय गुप्ता भी रिटायर्मेंट से चार दिन पहले अतिरिक्त चार्ज से मुक्त हुए।

हिमाचल की सुक्खू सरकार टाॅप पोस्टों को अतिरिक्त चार्ज से भरकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है,जो पोस्टें खाली हैं और व्यक्ति उपलब्घ है और सारी निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करता है तो एडमिशन चार्ज का मतलब कया है,उसके गले में बंदूक चलाकर गलत कार्य करने के लिए वाध्य किया जा रहा है,अडिशनल चार्ज वाले अधिकारी के ऊपर दबाव की तलवार हर समय लटकी रहती है और सरकार की इच्छानुसार आदेश जारी करने के लिए भी हर समय दबाव रहता है,
इस समय हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त मुख्य सचिव को अडिशनल चार्ज दिया गया है,पुलिसमहानिदेक को एक साल से अधिक समय से अडिशनल चार्ज देकर हांका जा रहा है,अब पालमपुर कृषि महाविद्यालय को भी अतिरिक्त चार्ज के साथ वाइस चांसलर बनाया गया है।निवर्तमान मुख्य सचिव संजय गुप्ता को भी सेवानिवृत्त से 4 दिन पहले अडिशनल चार्ज षे मुक्ति मिली और उन्हें नियमित किया गया,अडिशनल चार्ज का उद्देश्य कयां है इसके पीछे की मनसा क्या है ,यह सारा हिमाचल जानना चाहता है।
गणेश दत्त।

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