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वीरभद्र सिंह जी के देहांत के बाद उनके परिवार को राजनैतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती,कठिन डगर है इस पनघट की।श्रीमती प्रतिभा सिंह पर मण्डी लोक सभा तथा अर्की से उपचुनाव लड़ने का दबाव, लेकिन दुविधा बरकरार।

हिमाचल प्रदेश में 4 उपचुनाव होने के कारण सरकार व पार्टियों का पूरा ध्यान उपचुनाव जीतने की ओर लगा हुआ है,एक तरफ कांग्रेस को अपनी पुरानी सीट फतेहपुर व अर्की जीतने की चुनौती है,दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी को मण्डी संसदीय सीट और जुब्बल कोटखाई विधान सभा सीटों को बरकरार रखकर कर प्रदेश में अपने प्रभाव को दिखाने का अवसर है।
हिमाचल प्रदेश में स्वृ वीरभद्र सिंह जी का एकछत्र राज रहा है उनके विरोधी उनके सामने बोलने की हिम्मत नहीं रख पाते थे,उनके देहांत के बाद कांग्रेस में एक रिक्तता आ गयी है और वीरभद्र सिंह परिवार जो उसके नाम से राजनीति में अपना दबदबा रखता था वह लगभग समाप्त हो गया है।
श्री वीरभद्र सिंह की पत्नी को मणडी व अर्की दोनों जगह से चुनाव मैदान में उतरने के लिए आफर दिया गया है,लेकिन सूत्र बताते हैं कि मण्डी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए उन्होंन मना कर दिया है अब निश्चित है कि वह अर्की से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं।
अर्की से पिछली बार पार्टी के प्रत्याशी के रूप में श्री रतन सिंह पाल को मैदान में उतारा गया था और उन्होंने वीरभद्र सिंह के विरुद्ध 28 हजार वोट लेकर अपने को स्थापित कर दिया था उस समय भारतीय जनता पार्टी के पूर्व में दो बार विधान सभा सदस्य रहे श्री गोविंद राम का पूरा सहयोग रहा था लेकिन इस बार श्री गोविंद राम फिर से टिकट की दौड़ में शामिल हो गये हैं यदि पार्टी ने उन्हें नही मनाया तो निश्चित ही पार्टी को नुकसान हो सकता है,यही स्थिति जुब्बल कोटखाई की भी है यदि भाजपा नेत्री नीलम सरैक को साथ नहीं चलाया तो पार्टी को नुकसान हो सकता है।यद्यपि अभी थोड़ा समय सभझाने बुझाने का बचा हुआ है ,स्थितियों को संभालने का भी अवसर है।कुल मिलाकर दोनों पार्टियों में अभी स्थातियों संभालने की आवश्यकता है।कांग्रेस पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है क्योंकि वह विपक्ष में है और तर्क दिया जायेगा कि उपचुनाव हमेशा सत्ता पक्ष जीतता है।नुकसान भाजपा को होगा यदि सभी सीटें नहीं जीत सके तो क्योंकि भाजपा सत्त्ता में है।साथ ही मण्डी लोक सभा जीतना तो नितांत आवश्यक है क्योंकि मण्डी मुख्य मंत्री का अपना गृह जिला है।

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