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कोविड संकट के दौरान घरों में बंद, बच्चों के स्वभाव व मानसिक स्तर में बदलाव आया है,अभिभावक परेशान हैं,बच्चे केवल मोबाइल के आदि “यूज टू” हो गए हैं,अनुशासन भी समाप्त होता जा रहा है,बच्चों की दिनचर्या में भी अनियमित प्रभाव हाबी हो गया है बच्चों में चिड़चिड़ापन भी आ गया है,।हमने एक सर्वे किया है जिसमें बच्चों के पेरेंट्स से बात की तो सभी का यही कहना था कि स्कूल जल्दी से जल्दी खुलने चाहिए।चाहे सिफ्ट के अनुसार ही खुलें लेकिन स्कूल अवश्य खुलें।

स्कूल अवश्य खुलें ,चाहे सिफ्टवाइज ही खुलें,हम भी परेशान हो गये ,बच्चे भी परेशान हैं,हमने कहा कोविड से बच्चों को बचाने के लिए ही स्कूल बंद हैं वह अभिभावकों ने स्वीकार किया लेकिन स्कूल हर हाल में खुलें यह उनकी मांग थी,उनका कहना है कि चाहे सिफ्टवाइज खुलें या एक दिन छोड़कर खुलें,छात्रों के भविष्य के लिए स्कूल खोलना आवश्यक हो गया है अन्यथा वे मानसिक रूप से अपंग हो जायेंगे।
गणेश दत्त।

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