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हिमाचल प्रदेश में “आप”का खौफ दोनों ओर,आज तक का इतिहास भाजपा कांग्रेस के अलावा और कोई नहीं,नगर निगम शिमला के चुनाव में पता चलेगा कौन कितने पानी में,कहावत है कि Newsence ki value, भी होती है,सत्ता का पॉजिटिव व नेगेटिव दोनों पक्ष काम करते हैं सतर्क रहने की जरूरत है,नेतृत्व को ध्यान देना होगा कि चहेतों को अधिमान या सामाजिक छवि का सम्मान यह तय करेंगे सत्ता की राह।

हिमाचल प्रदेश में आज तक का राजनैतिक इतिहास रहा है कि हिमाचल में नये राजनैतिक दल का जन्म तो कई बार हुआ लेकिन बरसाती नालों की तरह एकाएक पानी गायब होने वाला इतिहास रहा है।

हिमाचल प्रदेश में इस बार आम आदमी पार्टी की उछलकूद पंजाब चुनाव के परिणामों के बाद एकाएक बढ़ गई है।चर्चा सर्वत है कि क्या होगा? क्या आप एक नये विकल्प के रूप में उभर कर सामने आ पायेगी? या पहले की तरह राजनीति के अंधकार में विलुप्त हो जायेगी।ज्यादा इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है, दो महिने के अंतराल में नगर निगम के चुनाव के समय पता चल जायेगा कि कौन कितने पानी में,यद्यपि नगर निगम चुनाव स्थानीय व व्यक्तिगत पहचान के मुद्दे पर लड़े जाते हैं इसलिए यह कहना कठिन है कि निगम निगम के चुनाव ही आगे का रास्ता तय करेंगे।लेकिन एक बात निश्चित है कि कुछ न कुछ भविष्य नगर निगम चुनाव आप की पहचान पर अपनी राय देंगे,क्योंकि निगम चुनाव में हार जीत का अंतर मात्र 20-30-50 वोटों से होता है।

इस समय प्रदेश की सत्ता में और निगम की सत्ता में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है,सत्ता विरोधी व सत्ता समर्थन दोनों काम करेंगे इसलिए फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।नगर निगम के चुनाव विधान सभा चुनाव में सत्ता रिपीट की आधारशिला भी रखेंगे।ऐसा राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय है।

किसी भी चुनाव में  पार्टी नेतृत्व का निश्छल व्यवहार व अपनी पसंद नापसंद के स्वभाव को त्याग कर इंसाफ  करने का मंत्र फलदायी होता है,चाहे वह समिति के चयन का हो या उम्मीदवार के चयन का हो कई बार नेताओं की पसंद हावी हो जाती है जो जनता व कार्यकर्ता के गले नहीं उतरती है और हार दिखती है तो बाद में बहाने हावी हो जाते हैं और वास्तविकता गौण हो जाती है इसलिए हर कदम पर न्याय की आवश्यकता होती है।

गणेश दत्त।

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