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Breaking News— हिमाचल में राजनैति पर्यटन की शुरुआत, जिन दियों में तेल होगा वे ही दिये जलते रहेंगे,चुनावी मौसम में किसके पांव लड़खड़ाते हैं,इंतजार कीजिये,अपनी अपनी पार्टी में किसी को टिकट की चिंता तो किसी को अपने किये पापों का फल भुगताने का समय -नगर निगम से विधान सभा चुनाव तक संयम की आवश्यकता ,बुरी हालत कांग्रेस पार्टी की होगी, तीसरी ताकत के आने से भाजपा को लाभ की स्थिति रहेगी।

हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण रहेंगे,एक प्रकार से प्रदेश में राजनैतिक पर्यटन की शुरुआत नगर निगम चुनाव से शुरू हो जायेगी। मीटिंग्स का दौर शुरू हो गया है।हिमाचल का मौसम भी इन दिनों अच्छा रहता है छोटे मोटे नेता भी चुनावी टूर बनाकर ठंडी वादियों का आनंद लेने के लिए हिमाचल का रुख करते देखे जायेंगे।

हिमाचल में आप पार्टी की सक्रियता से माहौल में एकाएक गर्मी आ गई है आप पार्टी का अति उत्साहि होना  पंजाबमे विजय प्राप्त करना है।यद्पि दोनों पार्टियां लगातार यही बयान दे रही हैं कि आप पार्टी का हिमाचल में कोई आधार नहीं है लेकिन अंदरखाने दोनों पार्टियों के अंदर डर का माहौल बना हुआ है।हिमाचल प्रदेश में जब जब भी तीसरी ताकत का जन्म हुआ है भारतीय जनता पार्टी को उसका लाभ हुआ है,पिछला इतिहास देखा जाय तो यह देखने को मिला है कि तीसरी ताकत के जन्म के साथ ही भाजपा सत्ता में आई है,इस समय प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है स्वभाविक है कि सत्ता विरोधी लहर का कहीं न कहीं पर असर तो होता ही है,यदि केवल एक ही पार्टी विरोध में हो तो सत्ता  विरोध का वोट सीधे विपक्ष के चला जाता है,यदि तीसरी ताकत भी अस्तित्व में हो तो सत्ता विरोधी वोट दो जगह बंट जाता है जिसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को होता है,हिमाचल में भी स्थिति बिल्कुल साफ है कि थोड़ा बहुत सत्ता विरोधी वोट यदि होगा भी तो वह दो जगह बंट जायेगा जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस पार्टी को होगा,इस बार का चुनाव वैसे भी कांग्रेस के लिए कठिन ही नहीं बहुत ही कठिन होगा,कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्य मंत्री वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति में यह चुनाव होगा।

कुल मिलाकर नगर निगम का चुनाव हो या विधान सभा का नवम्बर में होने वाले आम चुनाव हों दोनों चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए कठिन समय लाने वाले हैं।

यद्यपि भारतीय जनता पार्टी  की ठाकुर जयराम सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है ,जिसके कारण पार्टी को मुश्किल का सामना करना पड़े,साथ ही पार्टी का संगठन भी मजबूत है,केवल कुछ लोगों के खिलाफ व्यक्तिगत विरोध हो सकता है लेकिन पार्टी व सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है इसलिए भारतीय जनता पार्टी के लिए कोई चिंता का विषय नहीं है।देखना यह होगा कि जिन दियों में तेल होगा वे जलते रहेंगे और जिन में तेल नहीं होगा वे बुझ जायेंगे।

पंजाब में अप्रत्याशित विजय के बाद आप पार्टी अतिउत्साहित जरूर है लेकिन हिमाचल की तुलना पंजाब चुनाव से नहीं की जा सकती है।

गणेश दत्त।

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