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हिमाचल में तीन मुख्य सचिव? एक नामित और दो सम्मानित,प्रबोध सक्सेना मुख्य सचिव बनाये गये हैं, तथा रामसुभाग सिंह व संजय गुप्ता को मुख्य सचिव के समकक्ष रखा गया है,ये दोनों सीधे तौर पर मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को रिपोर्ट करेंगे।काफी कसम कस के बाद मुख्य सचिव की नियुक्ति की गई है,बरिष्ठता के आधार पर रामसुभाग सिंह व संजय गुप्ता प्रबोध सक्सेना से ऊपर हैं लेकिन सरकार ने सक्सेना को बना कर अपना द्रटिकोण साफ किया है।

हिमाचल सरकार  में प्रशासनिक संतुलन साधने की द्रष्टि से तीन मुख्य सचिव बनाये गये हैं।प्रबोध सक्सेना को मुख्य सचिव बनाया गया है और बरिष्ठता का ध्यान रखते हुए पूर्व में रहे मुख्य सचिव रामसुभाग सिंह को और संजय गुप्ता को मुख्य सचिव के समकक्ष  रखा गया है ये दोनों अधिकारी सीधे तौर पर मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को रिपोर्ट करेंगे ऐसा सरकारी नोटिफिकेशन में बताया गया है।

प्रबोध सक्सेना को प्रशासनिक कार्य दिया गया  है जबकि महत्वपूर्ण बिजली विभाग का अध्यक्ष रामसुभाग सिंह व पॉल्यूशन कन्ट्रोल का प्रमुख संजय गुप्ता को बनाया गया है।अमूमन ये दोनों विभाग मुख्य सचिव के पास ही रहते हैं।लेकिन संतुलन साधने की द्रष्टि से एक नया प्रयोग अमल में लाया गया है।

यहां बड़ी दिलचस्प बात यह है कि तीन मुख्य सचिवों की आपसी खींचतान का असर सीधे सरकार पर पड़ेगा।मुख्य सचिव की फाइल मुख्य मंत्री को सीधे जायेगी जिसका पता दोनों समकक्ष मुख्य सचिवों की जानकारी नहीं होगी ,उसी प्रकार दो समकक्ष मुख्य सचिव सीधे फाइल मुख्य मंत्री को भेजेंगे जिसका पता मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को नहीं चलेगा,मुख्य मंत्री किम मुख्य सचिव की फाइल पर आदेश जारी करेंगे।यह विचारणीय प्रश्न है।

मुख्य मंत्री सुखविंदर सुक्खू ने यद्यपि सभी को ऐडजेस्ट करने की कोशिश तो जरूर की है और बरिष्ठता का ध्यान रखने की भी कोशिश की है, लेकिन आगे इसके परिणाम क्या  होंगे इसका अध्ययन नहीं किया। इसका असर छोटे सबौडीनेट कर्मचारियों पर भी पड़ेगा वह किसके कहे पर फाइल खिसकायेंगे और किसके कहने से फाइल में ब्रेक लगायेंगे यह काफी कठिन साबित हो सकता है।इसका फल क्या होगा आने वाले समय में जब मंत्रिमंडल गठन होगा तो मंत्रिमंडल के सदस्य भी अपनी सुविधानुसार मुख्य सचिव व समकक्ष को आदेश देंगे। हालांकि यह विषय सरकार का है लेकिन प्रशासनिक पेंच कभी भी कहीं पर भी फंस सकता है ऐसा हम समझते हैं।

गणेश दत्त।

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