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हिमाचल सरकार प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र ला रही है,मैंने सोचा थोड़ा मैं भी कागज काले कर लूं ,श्वेत पत्र अवश्य लाना चाहिए प्रदेश के लोगों को अपने प्रदेश की माली हालत का पता अवश्य होना चाहिए, श्वेत पत्र लाने से वित्तीय संकट हल नहीं होगा लेकिन थोड़े दिन अखबारों की खुराक जरूर बन जायेगा ,क्योंकि मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधान सभा में श्वेत पत्र लाने की बात की है और उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक तीन मंत्रियों की समिति बनाई गई है उसने अपना काम करना ही है,श्वेत पत्र की अहमियत तब हो सकती थी जब वित्त सचिव व मुख्य सचिव कहीं बदल गये होते,वर्तमान मुख्य सचिव पूर्व सरकार में वित्त सचिव थे और वर्तमान वित्त सचिव मुख्य सचिव के करीबी व्यक्ति हैं ये दोनों अधिकारी अपने समय की कमियों को कयों उजागर करना चाहेंगे?इसलिए आंकडों का खेल भी नहीं हो सकता मात्र औपचारिकता मात्र पूरी होगी।

हिमाचल प्रदेश सरकार प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र लायेगी।उप मुख्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में बनी समिति पूर्व सरकार को घेरने मात्र के लिए श्वेत पत्र तैयार करेगी और आरोप लगाकर प्रदेश की जनता का ध्यान आकर्षित किया जायेगा कि पूर्व की जयराम ठाकुर की सरकार के कारण वित्तीय संकट पैदा हुआ है लेकिन ऐसा प्रमाणित करना कठिन होगा।

देखना यह होगा कि प्रदेश सरकार वित्तीय संकट पर कब से श्वेत पत्र लाती है?2012  से अब तक या जबसे घाटा बढ़ता गया तब से या पूर्व सरकार के कार्यकाल का लेखा जोखा सामने लाया जायेगा यह समय ही बतायेगा।वित्तीय संकट पर श्वेत पत्र लाने से समस्या का हल नहीं होगा।हमें संकट की तह तक पहुंचना होगा और जिसके कारण घाटा बढ़ता जा रहा है उसका निराकरण करना होगा।हमारे आय के साधन सीमित हैं अनावश्यक खर्चे अधिक हैं आय व खर्चों के बीच तालमेल नहीं है।हमारा बजट अधिकतर बेतन- पैंशन-ऋण की अदायगी और ब्याज पर पर चला जाता है विकास के लिए केवल 28% बजट बचता है।आप इनमें से कौन-कौन से खर्चे कम कर सकते हैं कोई भी नहीं, तो हमारे पास केवल टैक्स लगाने का विकल्प बचता है जिसे जनता स्वीकार नहीं करेगी।2024 के चुनाव के लिए भी कुछ मीठा मीठा बताना पड़ेगा। उसकी संभावना भी ना के बराबर है।इसलिए श्वेत पत्र केवल कागज काले करने तक ही सीमित रहेगा।श्वेत पत्र से न वित्तीय संकट हल होगा और न ही संकट को दूर किया जा सकता है।

गणेश दत्त।

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