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कांग्रेस की नई सरकार नये खुले संस्थानों को बंद करने के लिए आतुर क्यों?कैबिनेट के निर्णय से खुले संस्थान सरकारी नोटिफिकेशन से बंद या रद्द नहीं किये जा सकते ,सरकार निरंत रचलने वाली प्रक्रिया है तो ऐसा क्यों हो रहा है।।क्या पूर्व की सरकार ने बिना बजट के और बिना मूलभूत ढ़ाचे के अन्धाधुन्ध नये दफ्तर खोले थे?खोले गए संस्थान बंद करने पर जनाक्रोश शुरू में पनप गया है क्या सुक्खू सरकार इस आक्रोश को झेल पायेगी।इस तरह की प्रथा से जनता में क्या संदेश जायेगा।

हिमाचल प्रदेश में नई सरकार को बने लगभग 11 दिन का समय हो गया है।मंत्रिमंडल के अभाव में मुख्य मंत्री व उप मुख्य मंत्री सरकार चला रहे हैं नीतिगत निर्णय भी ले रहे हैं नीतिगत निर्णय लेने का सरकार को अधिकार प्राप्त है कयोंकि दोनों का शपथ ग्रहण हो चुका है।सरकारी परिभाषा में आनन-फानन में लिये गए निर्णय को बाईसर्कुलेशन निर्णय कहा जाता है जिसे कैबिनेट का ही निर्णय कहते हैं।

सरकार ने आते ही पूर्व सरकार के कैबिनेट द्वारा लिये गए निर्णयों को प्रशासनिक नोटिफिकेशन के माध्यम से बहुत से सरकारी संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया है।सरकार को यदि लगता है कि बिना कैबिनेट की स्वीकृति या बिना बजट के नये संस्थान खोल दिये हों तो नयी सरकार उसपर पुनर्विचार कर सकती है।यदि बजट प्रावधान किया गया हो और कैबिनेट से स्वीकृति मिली हो तो ऐसे संस्थानों को बंद नहीं किया जा सकता क्योंकि संस्थान जनता की आवश्यकतानुसार व जनहित में खोले जाते हैं।

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि सुक्खू सरकार बदले की भावना से कार्य कर रही है और भाजपा के सरकार के निर्णय बदलने के पीछे उनकी राजनीतिक प्रतिशोध की भावना है।इसको लेकर भाजपा ने आन्दोलन करने का निर्णय भी लिया है और इस विषय को राज्यपाल महोदय के ध्यान में लाने का निर्णय लिया है।

पूर्व मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर व पार्टी अध्यक्ष श्री सुरेश कश्यप ने कहा है कि पूर्व सरकार के लिए गये निर्णयों को पलटना एक अच्छी परम्परा नहीं है ऐसी हरकतों को कदापि स्वीकार नहीं किया जायेगा।उनका कहना है कि 2017 जब भाजपा की सरकार आई थी तो भारतीय जनता पार्टी सरकार ने कांग्रेस सरकार का एक निर्णय भी पीटा था और न ही उनके द्वारा खोले गए संस्थान बंद किए गये थे।पार्टी नेताओं ने मुख्य मंत्री व उप मुख्य मंत्री से कहा है कि वे इस प्रकार के बदले की भावना से लिए जा रहे निर्णयों को बंद करे अन्यथा सरकार को जनाक्रोश को सहन करने के लिए तैयार रहे।

 

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