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हिमाचल सरकार पर आर्थिक संकट का एक और दौर शुरू,केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हिमाचल की कर्ज लेने की सीमा को 14500 करोड़ की सीमा को घटाकर 9000 करोड़ कर दिया है इस प्रकार अब हिमाचल प्रदेश को 5500 करोड़ कर्ज कम मिलेगा। साथ ही 1780 करोड़ रुपए की न्यू पैंशन की मिलने वाली ग्रान्ट पर भी रोक लगा दी है ,यह मामला ओल्ड पैंशन व न्यू पैंशन योजना के विवादों के बीच सामने आया है अब सरकार को इसकी क्षति पूर्ति का कोई रास्ता तलासना पड़ेगा।

हिमाचल सरकार के सामने वित्तीय संकट का नया मामला खड़ा हो गया है।केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार की कर्ज लेने की सीमा को 14500  करोड़ से घटाकर 9000 करोड़ कर दिया है साथ ही न्यू पैंशन योजना के एवज में मिलने वाली 1780 करोड़ की ग्रांट को भी फिलहाल रोक दिया गया है।यह मामला O P S /N P S के बीच चल रहे विवाद के बीच खड़ा हो गया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पहले आगा कर दिया था कि जो जो सरकारें ओल्ड पैंशन को बहाल करने जा रही हैं वे वित्तीय प्रबंधन अपने साधनों से करेंगी तथा उन सरकारों को कर्ज लेने की अनुमति भी सीमित कर दी जायेगी।

मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि वे इस विषय को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से मिलेंगे और हिमाचल का पक्ष रखेंगे।लेकिन  केंद्रीय सरकार ने जो निर्णय पहले ले लिए हैं उनमें पीछे हटना कठिन होगा।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिमाचल सरकार के सामने एक ही विकल्प है कि वह पंजाब पुर्नगठन आयोग के निर्णय के अनुसार चंडीगढ हरियाणा पंजाब से 7,19% का हिस्सा लेने के प्रयास करे।इस विषय पर पर सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही आदेश दे  रखे हैं जिसमें हिमाचल को लगभग 4200 करोड़ की राशि मिल सकती है।

गणेश दत्त।

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