UGC के नये नियम हंगामे बबाल और सर्वोच्च न्यायालय का नियमों पर रोक,आखिर किस के कहने से लाया गया नया UGC,घ कानून न्याय संगत व समानता के लियेआना चाहिए न कि ,समाज को बांटने के लिये,हैरानी विषय यह था कि नये UGC कानून के नियमों के आने के बाद कांग्रेस, सपा आप जैसी पार्टी के लोग खुश थे और कई प्रदेशों में कांग्रेस के नेता नये नियमों का स्वागत कर रहे थे,सर्वोच्च न्यायालय स्थगन के बाद अब वे ही दल सरकार को कोश रहे हैं यह समझ से परे है।
UGC के नये नियम कांग्रेस और अन्य पार्टियों के लिए खुशी के गुब्बारे कयों बने,यू जी सी कमेटी के सदस्य यह बतायेंगे कि नये नियम किस की सह पर और किसको खुश करने के लिए लाये गये।
छोटी छोटी बात पर हंगामा खड़ा करने वाली कांग्रेस सपा आप और अन्य विरोधी दल यू जी सी के नये नियमों का आनन्द कयों ले रहे थे यह सोचनीय विषय तो है ही,केन्द्र सरकार को परेशान करने में जातिवाद का विष घोलने और समाज को बांटने वाले नियम लाने में आखिर किसकी सोच रही होगी?
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग किसी एक वर्ग के खिलाफ नहीं होने देंगे लेकिन लोग कह रहे थे कि मौखिक आश्वासन का कोई औचित्य नहीं है, ब्लैक एन्ड वाइट में आना चाहिए।
यू जी सी के नये नियम आने के बाद कुछ याचिकाएं दाख़िल हुई और सर्वोच्च न्यायालय ने यू जी सी के नये नियमों रोक ही नहीं लगाई सरकार से दुबारा ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कहा है, साथ ही इस नियम को समाज को विभाजन करने वाला भी बताया है।सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का स्वागत होना चाहिए, न्यायालय के निर्देश के बाद देश के भीतर उत्पन्न बबाल थम गया है,सभी पक्षों को अब नये ड्राफ्ट और न्यायालय के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।
गणेश दत्त।
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