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सिरमौर के हाटियों को जनजातीय दर्जा देने के बाद श्रेय लेने की होड़,मामला 50 वर्षों लटका हुआ था अब जाकर प्रस्ताव पास हुआ,विधान सभा चुनाव से पहले सैद्धांतिक रूप से मोदी सरकार ने हाटियों को जनजातीय दर्जा देने की मंजरी दे दी थी लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया में समय लगने के बाद विधान सभा चुनाव में भाजपा को उतना लाभ नहीं हुआ था जिसकी अपेक्षा थी,कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनैतिक घोषणा कह कर लोगों को भड़काने का काम किया था,लोक सभा चुनाव में भाजपा को इसका लाभ निश्चित मिलेगा।अब हाटियों को जनजातीय दर्जा देने के बाद श्रेय लेने की होड़ सी लग गई है लेकिन क्षेय तो भाजपा को ही मिलना चाहिए जिसने गंभीरता से मुद्दे को अंजाम दिया है।

सिरमौर के हाथियों को अब जनजातीय दर्जा मिल गया है।अभी हाल ही में केंद्रीय सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।यह विषय सिरमौर के हाथियों के लिए किसी बरदान कम नहीं है।पूर्व में कांग्रेस सरकार ने प्रस्ताव तो किया था लेकिन औपचारिकता मात्र निभाई थी।भाजपा सरकार के समय पहले प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल की सरकार व बाद में जयराम ठाकुर की सरकार के समय इस मुद्दे को लौजिकल एन्ड तक पहुंचाने में भाजपा ने बहुत कोशिश की है।

विधान सभा चुनाव के समय से पूर्व हाथियों को जनजातीय दर्जा देने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के कारण भाजपा को आशातीत लाभ नहीं मिल सका था लेकिन अब लोकसभा में यह बिल पास हो गया है तो निश्चित ही हाटियों के व भाजपा के लिए एक उत्सव से कम नहीं है।निश्चित रूप से आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को इसका लाभ अवश्य मिलेगा।और हाथियों को जनजातीय दर्जा मिलने के बाद वहां के लोगो को बहुत बड़ा लाभ मिलेगा।

गणेश दत्त।

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