“जलो मत रीस करो ” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने वाली कांग्रेस के लिए यह स॔देश बहुत कारगर साबित हो सकता है,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है और विश्व का सबसे बड़ा गैर राजनीतिक स॔गठन बन चुका है,लेकिन सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस लगभग सिमट गई है , कांग्रेस इन दिनों संघ के लगातार बढ़ते प्रभाव से खाशी परेशान है और स॔घ पर प्रतिबंध लगाने की बात कहकर अपनी खींज मिटा रही है,कांग्रेस ने स॔घ पर 3 बार प्रतिबंध लगाया पहला 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के समय दूसरा 1975 में आपातकाल लगने के समय और तीसरा 1992 में बाहरी मस्जिद ध्वस्त होने के समय,स॔घ को सबसे बड़ा नुकसान 1948 के प्रतिबंध के बाद हुआ जब गांधी की हत्या का दोष संघ के गले मढ़ दिया गया था लेकिन आयोग ने संघ के किसी संलिप्तता को खारिज कर दिया था लेकिन कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए आज तक संघ को गांधी जी की हत्या का आरोप स॔घ पर लगाती आई है।स॔घ शताब्दी वर्ष में सारे देश में व्यापक कार्यक्रम चल रहे हैं लेकिन कांग्रेस को स॔घ का विराट स्वरूप डर पैदा कर रहा है और बार-बार स॔घ पर प्रतिबंध लगाने की बात की जा रही है यह कांग्रेस इच्छा अब कभी स॔भव नहीं पायेगी।
कांग्रेस पार्टी इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विशाल स्वरूप को देखकर खाशी परेशान है,उनकी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संघ पर प्रतिबंध लगाने की बात कह कर अपनी खींज मिटा रहे है,एक ओर पांच स्वयंसेवकों के साथ खड़ा किया गया संगठन आज विश्व का सबसे बड़ा गैर राजनीतिक संगठन बन कर खड़ा हुआ है और दूसरी ओर देश का सबसे बड़ा राजनीतिक दल कांग्रेस आज सारे देश से सिमटकर अन्य क्षेत्रीय दलों का पिछलग्गू बन गया है ,स्वभाविक है कांग्रेस की कुंन्ठा सिर चढ़कर बोल रही है।
कांग्रेस को इस वाक्य पर ध्यान देना चाहिए “जलो मत रीस करो” कांग्रेस प्रतिस्पर्धात्मक कार्य करने की आवश्यकता है न कि जलने की।
गणेश दत्त।
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