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हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार C P S के नियुक्ति के मामलों पर हिमाचल हाईकोर्ट में चल रहे मामलों के निस्तारण के बाद ही संभव, अभी हिमाचल हाईकोर्ट के निर्णय तक मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कम नजर आ रही है,कांग्रेस पार्टी का हाईकमान “वेट एन्ड वाच” की नीति पर चल रहा है,मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट भी ज्यादा लम्बा नहीं खींच सकता कयोंकि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी ऐसे मामलों को लेकर फ़ैसला सुनाया है कि इस प्रकार की नियुक्ततियां असंवैधानिक हैं और आफ़िस आफ परोफिट के दायरे में आती हैं यह ठीक है कि मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समय समय पर मंत्रिमंडल विस्तार की बात कहकर विधायकों को ढाढस बांधवा कर उनकी आस जिंदा रखते हैं।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बने लगभग 7 माह का समय बीत चुका है।मंत्रिमंडल में शामिल न हो पाने वाले विधायकों का सब्र अब टूटता नजर आ रहा है।हिमाचल के सबसे बड़े जिले कांगड़ा से केवल एक मंत्री का बनाया जाना लोगों को हजम नहीं हो रहा है।

इस समय प्रदेश में  मंत्रिमंडल में 3 सीटें खाली पड़ी हैं।बिलासपुर व कांगड़ा मंत्रिमंडल में जगह प्राप्त करने के लिए संघर्ष रत है।जातीय व क्षेत्रीय संतुलन बनाना भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौतीपूर्ण विषय है।अगले साल लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं इसलिए कांग्रेस को समय रहते जिलों के गुस्से को ठंडा करना पड़ेगा अन्यथा नुकसान होना तय है।कांग्रेस पार्टी ने लोक सभा चुनाव के लिए आंतरिक सर्वे कराया है बताया जा रहा है कि कांग्रेस अभी शून्य पर खड़ी है ।ऐसी परिस्थिति में मंत्रिमंडल विस्तार जरूरी भी है लेकिन सी पी एस पर कोर्ट का निर्णय शीघ्र आने की भी संभावना है।ऐसा समझा जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार कोर्ट के निर्णय के बाद ही हो सकता है।

गणेश दत्त।

 

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