हिमाचल विधान सभा चुनाव,चयनकर्ताओं के लिए अग्नि परीक्षा,भाजपा के बड़े नेताओं को अहम तोड़कर,पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों का साथ दिया तो इस बार पार्टी 50 सीटें जीत सकती है, चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों को भी संयमशील होना पड़ेगा ,केवल मैं बाकी कोई नहीं के अहम को तोड़कर पार्टी के आदेश को मानना ही होगा;अभी से कुछ बड़े नेता कह रहे हैं कि मैं नहीं तो कोई नहीं ,चयनकर्ताओं की अग्नि परीक्षा का समय आ गया है।
हिमाचल विधान सभा के आगामी चुनाव सभी पार्टियों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे।भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती कुछ अधिक है पार्टी के पक्ष में हवा होने के कारण बहुत अधिक प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं।यद्यपि सत्ता में रहते सत्ता विरोधी हवा का भी सामना करना पड़ सकता है।खासकर जो लोग अभी मंत्री हैं या विधायक हैं या बड़े पदाधिकारी हैं उनसे कार्यकर्ताओं की उम्मीदें भी अधिक रहती हैं,जिन बड़े नेताओं का व्यवहार कार्यकर्ताओं के प्रति ठीक नहीं रहा है उन्हैं कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है।लेकिन जिन लोगों ने कार्यकर्ताओं में समन्वय बना रखा है उन्हें चुनाव जीतना आसान रहेगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा पूरी तरह स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं हिमाचल से राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के कारण उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर है,संगठन में कोई संसय न रहे उन्होंने मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर के पक्ष में खड़ेहोकर स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव जयराम ठाकुर के नेतृत्व में ही लड़े जायेंगे ।साथ साथ पार्टी संगठन के साथ बैठकर आगामी योजना को भी वह दिशा देते रहे हैं खासकर पुराने रूठे ,निराश उदास कार्यकर्ताओं की चिंता करने का संदेश देते रहे हैं।
कई बड़े नेता यह कहते सुने जा सकते हैं कि यदि टिकट मुझे नहीं तो किसी को जीतने नहीं दूंगा ,यह बात विभिन्न क्षेत्रों में चिन्ता का सबब बन रही है।उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी पार्टी को काफी कसरत करनी पड़ेगी।
भारतीय जनता पार्टी में गत् 8-9माह में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व खासकर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सौदान सिंह जी ने सभी मंडलों की बैठकें कर कार्यकर्ताओं को समझाने संतुष्ट करने का प्रयास किया है,साथ ही पार्टी प्रभारी अविनाश राय खन्ना जी सह प्रभारी संजय टण्डन जी ने भी प्रयास किए हैं संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से भी शहद घोलने का कार्य होता आ रहा है लेकिन अभी तक भी कई मण्डलों में अधिक सुधार नहीं हो सका है।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी बहुत बुरे दौर से गुजर रही है पूर्व मुख्य मंत्री श्री वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद स्थिति ज्यादा चिंताजनक हो गई है। जो लोग यह कहते थे कि हमें हौलीलौज से मुक्त कराओ ,फिर से हौलीलौज के राजनीति का केंद्र बनने से बहुत से पार्टीजन परेशान हैं नेतृत्व की पकड़ पार्टी में नहीं है।इस समय लगभग 5 लोग मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हो गये हैं तथा एक दूसरे को फूटीआंख नही देखना चाहते हैं ऐसे में सत्ता में वापसी असंभव लग रही है।
आप पार्टी की स्थिति भी कोई उत्साह जनक नहीं है।एक बात अवश्य है कि ये पार्टी कुछ वोटो लेकर किसी का भी गणित बिगाड़ सकती है।इस पार्टी को खिलखिलाता पार्टी भी कहा जा सकता है जिसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को हो सकता है।
गणेश दत्त।
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