शिमला नगर निगम में 11 साल बाद कांग्रेस की वापसी 24 सीटें जीतकर कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की ,भाजपा को 9 सीटों पर संतोष करना पड़ा,1 सीट पर वामपंथी जीते , मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पहली विजय,लेकिन मुख्य मंत्री व उप मुख्य मंत्री अपने अपने क्षेत्र में जिलापरिषद व पंचायत समिति के चुनाव हार गये तीनों स्थोनों में भारतीय जनता पार्टी को विजय प्राप्त हुई है,अब शिमला नगर-निगम में सुक्खू समर्थक सुरेन्द्र चौहान का महापौर बनना लगभग तय है।
शिमला नगर निगम में कांग्रेस पार्टी ने शानदार जीत हासिल की है।शिमला नगर निगम की 34 सीटों में से 24 सीटें जीतकर भाजपा को झटका तो दिया ही है लेकिन 11 वर्षों बाद नगर निगम में वापसी की है।कांग्रेस पार्टी ने 25 सालों तक निगम पर कब्जा किया हुआ था लेकिन 2012 में सीधे चुनाव में निगम पर वामपंथी जीतकर आये थे।2017 के निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्ट ने विजय प्राप्त की थी।लेकिन सरकार के सहारे 24 सीटों पर कब्जा कर शानदार जीत हासिल की है।
पिछले चुनाव में एक मात्र सीट वामपंथी जीतकर आये थे श्रीमती शैली शर्मा ने समरहिल सीट से जीत प्राप्त की थी लेकिन वह बाद में भाजपा में शामिल हो गथी थी लेकिन वह इस बार भाजपा की टिकट से हार गई हैं ।इस बार समरहिल की परम्परागत सीट वामपंथियों ने जीती है।
विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के गढ़ रहे और हमेशा गढ़ समझे जाने वाले शहर के तीनों वार्ड भी भाजपा के हाथ से निकल गये हैं।यह कहा जा सकता है कि अन्डर करंट भाजपा खिलाफ व कांग्रेस के पक्ष में हवा थी।
भारतीय जनता पार्टी ने श्रीमती नीना चौहान,सरोज ठाकुर,कल्याण धीमान; कमलेश मेहता;आशा शर्मा ,निशा ठाकुर तथा रचना झिना शर्मा की सीटें जीती हैं।
इन चुनावों की विशेषता यह रही कि उना व नादौन में हुए नगर पंचायत व जिलापरिषद की सभी सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीती हैः और कांग्रेस सभी जगह हारी है
गणेश दत्त।
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