#हिमाचल की सुख्खू सरकार के लिए मुसीबतों के अंबार , सुख कम समस्यायें अधिक,लेकिन सुक्खू दृढ इच्छानुसार झेलने को तैयार,इस महिने 2 हजार करोड़ का कर्ज लेंगे,सबसे पहले ओल्ड पैंशन के लिए बजट का जुगाड़ और उसके बाद वेतन पैंशन का इंतजाम करना किसी पहाड़ की चुनौती से कम नहीं,पार्टी के भीतर पनपता रोष ,क्षेत्रीय संतुलन व सभी को साथ लेकर चलना कठिन कार्य,मंत्रिमंडल व नियुक्तियों पर खींचतान जारी ,अगला महिना पड़ेगा भारी,विधान सभा सत्र में उनके साथियों की परीक्षा होगी, चुनावी वायदे सरदर्दी का कारक बने।
हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के लिए आर्थिक संकट रोज नयी समस्या लेकर आ रहा है।कर्ज लेने की सीमा लगभग समाप्त हो गई है। सरकार इस महिने 2 हजार करोड़ का कर्ज लेगी।
सबसे बड़ी समस्या ओल्ड पैंशन बहाल करने के निर्णय को अमलीजामा पहनाने का है उसके लिए जुगाड़ किया जा रहा है।कांग्रेस पार्टी ने पहली गारंटी में कहा था कि ओल्ड पैंशन पहली कैबिनेट से दे दी जायेगी,पहली कैबिनेट ने निर्णय जरूर ले लिया है लेकिन अभी तक उसके लिए फार्मूला तय नहीं हो सका है,कई पेचीदगियां हैं उसका हल ढ़लने के लिए टीम काम तो कर रही है लेकिन लौजिकल एन्ड तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
14 मार्च से विधान सभा का सत्र शुरू होने जा रहा है संभवतया यह सरकार की पहली परीक्षा का समय होगा जब मजबूत विपक्ष सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगेगा।तब तक सरकार के तीन महिने से अधिक का समय हो चुका होगा।इसलिए सरकार की जवाब देही भी बनती तो है।हालाकि किसी भी सरकार को सटल होने में कैसे कम 6 महिने का समय तो लगता ही है लेकिन सरकार के कसमें वायदे उन्हैं अधिक समय नहीं दे पायेंगे।
मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू संघर्षशील व्यक्ति रहे हैं उन्हें मुख्य मंत्री का पद भी संघर्ष से ही प्राप्त हुआ है।कहते हैं कि जितनी बड़ा सिर उतना बड़ा सिरदर्द होता है।
अभी मंत्रिमंडल विस्तार क्षेत्रीय संतुलन,सरकारी नियुक्तियों में सबका ध्यान रखना भी बड़ी चुनौतीपूर्ण खेल है इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू को आगे बढ़ना है।देखना होगा कि सुक्खू को उनके मंत्रिमंडल के साथियों और जो अभी मंत्रिमंडल में नहीं हैं उनका कितना साथ मिलता है यह आने वाला समय बतायेगा।
गणेश दत्त।
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