हिमाचल में 3 उपचुनाव सत्तारूढ पार्टी के लिए चुनौति भी अवसर भी।
हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए आगामी 3 महिने का समय काफी संघर्ष व चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।एक ओर कोरोना महामारी से लड़ाई तो दूसरी ओर 3 उपचुनाओं का मुकाबला सत्तारूढ पार्टी के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं।
मण्डी संसदीय क्षेत्र के चुनाव, फतेहपुर विधान सभा चुनाव और जुब्बल कोटखाई विधान सभा चुनाव एक साथ होंगे।जहां तक मण्डल लोक सभा चुनाव की बात है,यह क्षेत्र मुख्य म॔त्री के ग्रह क्षेत्र में आता है स्वभाविक है कि मुख्य मंत्री के ग्रह क्षेत्र में चुनाव जीतना आसान होगा।
जहाँ तक बात फतेहपुर व जुब्बल कोटखाई की है यहां मुक़ाबला कड़ा रहेगा।फतेहपुर सीट कांग्रेस के विधायक स्व सुजानसिंह पठानियां की मृत्यु के कारण खाली हुई है,वही जुब्बल कोटखाई की सीट भारतीय जनता पार्टी के कदावर नेता श्री नरेंद्र बरागटा की अकस्मात मृत्यु के कारण खाली हुई है।स्व बरागटा का इस क्षेत्र में खासा प्रभाव था,यद्यपि यह क्षेत्र कांग्रेस बाहुल्य क्षेत्र रहा है ,संभवत श्री बरागटा के पुत्र चेतन बरागटा को यहां से टिकट मिलने की अधिक संभावना है,चेतन अपने पिता जी के साथ राजनीतिक क्षेत्र में हाथ बंटाते आये हैं और जनता में पहचान भी है।
फतेहपुर चुनाव क्षेत्र में पार्टी के कई उम्मीदवार टिकट की चाह में हैं पिछली बार वहां से पार्टी के राज्यसभा सांसद श्र किरपाल परमार चुनाव लड़े थे लेकिन पार्टी के ही एक अन्य प्रत्याशी ने आजाद चुनाव लड़ा था और किरपाल परमार चुनाव हार गये थे।
हिमाचल में सरकार के कार्यकाल को साढ़े तीन साल हो गए हैं यद्यपि सरकार की छवि व मुख्य म॔त्री की छवि बहुत अच्छी लेकिन सत्ताविरोधी वातावरण स्वमेव ही पैदा हो जाता है।इसलिए आगामी समय भाजपा व भाजपा सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।
गणेश दत्त, प्रधान सम्पादक।
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