मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर की अत्यधिक सक्रियता से कांग्रेस परेशान, मुख्य मंत्री के सामने दो चुनौतियां एक उपचुनाव जीतन दूसरी मिशन रिपीट 2022।दोनों चुनौतियां एवरेस्ट में विजय प्राप्त करने के समान।
मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर की अत्यधिक सक्रियता कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन गयी है।मुख्य म॔त्री पिछ्ले दिनों से काफी सक्रिय होकर प्रदेश के कोने कोने में सरकार की उपल्ब्धियों को घर-घर पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
मुख्य म॔त्री के सामने दो चुनौतियां मुंह बाये खड़ी हैं पहली चुनौती उप चुनाव जीतकर अपने प्रति जनता के विश्वास पर मुहर लगाना और दूसरा अगले वर्ष होने वाले विधान सभा के चुनाव हैं।
पहले भारतीय जनता पार्टी को ढैया वाली पार्टी कहा जाता था लेकिन मुख्य म॔त्री रहे प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने ढैया के मिथ को तोड़कर 5 साल शासन करने का और अच्छी सरकार देने का रिकार्ड बनाया लेकिन मिशन रिपीट सफल नहीं हो पाया था उस समय पार्टी में टूटन के कारण यह संभव नहीं हो पाया था।
भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व अब बार-बार इस बात को दोहरा रहा है कि कांग्रेस और भाजपा की बारी बारी वाली स्थिति को समाप्त कर लम्बे समय तक पार्टी की सरकार चले ताकि विकास में व्यवधान न पड़े।उसी लक्ष्य को लेकर पार्टी रात दिन मिशन रिपीट का मंत्र कार्कर्ताओं को पढ़ा रही है लेकिन यह अभी तक भविष्य के गर्भ में है कि मिशन रिपीट होगा या बारी बारी वाली ष्थिति रहेगी।
इस बार भारतीय जनता पार्टी के लिए सुखद स्थिति यह है कि विपक्ष के पास पूर्व मुख्य मंत्री श्री वीरभद्र सिंह जैसा कद्दावर नेता नहीं है।वीरभद्र सिंह का प्रदेश के हर कोने में अच्छा खासा प्रभाव था लेकिन अब कांग्रेस के पास उस स्तर का कोई नेता नहीं है,यह भारतीय जनता पार्टी के लिए एक सुखद स्थिति है।
मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर दौड़ भाग काफी कर रहे हैं,और जनता को अपने पक्ष में करने का पूरा प्रयास भी कर रहे हैं लेकिन उनके सहयोगी मंत्री केवल अपने विधान सभा क्षेत्र तक ही सीमित हैं।इसलिए पूरा बोझ मुख्य मंत्री के कंधों पर ही रहता है।आने वाला समय निश्चित ही चुनौतीपूर्ण रहेगा और कुछ विरोधियों की उछलकूद भी बड़ेगी छिस पर अंकुश लगाना भी आवश्यक होगा।तब जाकर चाहे उपचुनाव जीतना हो या मिशन रिपीट करना हो दोनों चुनौतियों पर पार पाना आवश्यक है।
गणेश दत्त।
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