हिमाचल के उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं,भाजपा के लिए सुखद स्थिति है, कि 4 साल के बाद भी विरोध के लिए कोई ठोस मुद्दा खड़ा नहीं हुआ है नवरात्रि में उम्मीदवार घोषित होंगे,केन्द्र में भाजपा की सरकार व हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर की सरकार का तालमेल व विकास के लिए धन की कमी नहीं होना सरकार के लिए सुखदहै,मुद्दा केवल संगठन में सामन्जस्य का है जो परिणामों को बदल सकता है।
हिमाचल प्रदेश में 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव दोनों बड़ी पार्टियों, भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं भाजपा को 4 साल की सरकार की कार्यकुशलता और कांग्रेस को अपनी खोई हुई ताकत को अजमाने का अवसर होगा,यह चुनाव कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति में होगा।उनकी स्वयं की सीट बचाना भी कांग्रेस के लिए लोहे के चने चबाने से कम नहीं होंगे।
भारतीय जनता पार्टी के लिए एक सुखद स्थिति यह है कि 4 साल का सरकार का कार्यकाल दिसंबर में पूरा होने जा रहा है,फिर भी सरकार के खिलाफ ऐन्टीइस्टबिल्सैंट वोट पैदा नहीं हुआ। साथ ही दिल्ली में प्रधान मंत्री जी सहित पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा एवं केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर का हिमाचल प्रदेश से होना व सरकार का पूर्ण सहयोग प्राप्त होना पार्टी के लिए सुखद स्थिति मानी जा सकती है क्योंकि प्रदेश के लिए विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं आ रही है,और दोनों सरकारों के कदम व स्वर भी एक साथ मिलकर काम करते हैं।
अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई है नवरात्र के पहले दिन 7 अक्टूबर को घोषणा संभव है।
लोक सभा मण्डी सीट पार्टी व मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मण्डी संसदीय क्षेत्र मुख्य मंत्री का अपना जिला है और यह सीट भाजपा की रही है।विधान सभा सीटों में जुब्बल कोटखाई सीट भाजपा की रही है,अर्की व फतेहपुर सीट कांग्रेस के विधायकों की मृत्यु के बाद खाली हुई हैं।प्रत्यासियों की घोषणा के बाद ही सीटों के समीकरण का पता चल पायेगा।
एक बात ध्यान रखने योग्य होगी कि संगठन में सामन्जस्य व एकता न होने की स्थिति में परिणाम कुछ भी हो सकते हैं संगठन में विघटन पार्टियों के गणित को फेल कर सकते हैं।
गणेश दत्त।
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