हिमाचल में बागियों का खेल,सभी दलों का निकाल रहे हैं तेल,30 अक्टूबर को हो जायेगी स्थिति साफ ,कौन किसके लिए वरदान कौन अभिषाप ,पता चलेगा 8 दिसंबर को;इतनी अनुशासन हीनता का कारण कया है, क्या पार्टियों में अनुशासन की प्रबृति समाप्त हो रही है?आयाराम गयाराम के चलन से राजनीति गंदी होती जा रही है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा के चुनाव 12 नवम्बर को होने जा रहे हैं।परिणाम 8 दिसंबर को आयेंगे।इस बार के चुनाव में दोनों दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में बागियों की लम्बी चौड़ी फौज खड़ी हो गई है।भाजपा व कांग्रेस के लिए बागी एक चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं मनाने आश्वासन,समझाने पुचकारत का सिलसिला जारी है
बागियों फौज खड़ी होने के पीछे कारण क्या हैं कार्यकर्ताओं में अनुशासन हीनता या नेतृत्व के प्रति पनपता गुस्सा या संस्कारों की कमी यह विषय आज सभी जगह चर्चा में है अभी नाम वापसी का समय 29 अक्टूबर तक का बचा है,देखना यह होगा कि बागी चुनाव मैदान से हटते हैं या डरते हैं।उसके बाद ही पता चलेगा कि कौन किसको रगड़ा लगा रहा है।राजनैतिक दलों की परेशानी समझी जा सकती है कि कौन बागी पार्टी का खेल बिगाड़ेगा और कौन जितायेगा इस विषय पर जोड़ घटाने का क्रम जारी है।लेकिन एक बात तो तय है कि किसी पार्टी में अनुशासन नहीं बचा है अन्यथा टिकट देने के पश्चात मैदान में डटे रहने का क्या कारण है।आने वाले दिनों 30 को स्थिति साफ हो जायेगी कि ऊंट किस करवट बैठता है।
गणेश दत्त।
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