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चुनाव में 100 जनकल्याणी मुद्दे गौंड़ हो जाते हैं ,जब एक मुद्दा भारी पड़ जाता है हिमाचलके चुनाव में ऐसा ही देखने को मिला, भाजपा की समीक्षा बैठक में जीत की पूरी संभावना व्यक्त की गई,मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर ने माना कि कई सीटों पर बहुत कम अंतर रहेगा, सरकार हम ही बनायेंगे ,केन्द्र की ओर से चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री मंगल पान्डे ने कहा भाजपा की विजय “रिवाज बदलना” निश्चित है।चुनाव संचालन समिति की समीक्षा बैठक में सभी समितियों की कार्यकुशलता की सराहना हुई ,8 दिसंबर तक सभी दलों की धुकधुकी बढ़ी,भाजपा पूरी तरह आश्वस्त तो कांग्रेस संसय में।

  1. हिमाचल विधान सभा चुनाव में केवल ओ पी एस का एक मुद्दा पूरे चुनाव का केन्द्र बिन्दु बना रहा।महंगाई बेरोजगारी भी मुद्दा रहा लेकिन कर्मचारियों ने ओ पी एस को इतना भुनाया कि बाकी सारे मुद्दे गौण हो गए। सरकार के सैकड़ों जनकल्याणी काम भी बैकग्राउंड में चले गए।
  2. भाजपा का कर्मचारी सैल भी इस मुद्दे को न्यूट्रिलाइज नहीं कर पाया।यद्यपि प्रदेश की ठाकुर जयराम जी की सरकार ने इस विषय पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित  की है जो सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
  3. पुरानी पैंशन का मामला केन्द्र सरकार से संबंधित है 2003 में सभी प्रदेश सरकारों को पुरानी पैंशन बंद कर नयी पैंशन योजना को लागू करने संबंधित एक ड्राफ्ट केन्द्र द्वारा सभी प्रदेशों को भेजा गया था जिसे सबसे पहले तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने सबसे पहले स्वीकृति प्रदान की थी लेकिन समय के बीतने के पश्चात कर्मचारियों को रिटायर्मेंट के समय बहुत कम पैंशन मिलनी शुरू हुई उसकी परणीति एक आन्दोलन में परिवर्तित हो गई और ओ पी एस एक बड़ा मुद्दा बन गया।2022 के चुनाव के समय हालांकि कांग्रेस ने कहा है कि हम पहली कैबिनेट में इसे लागू करेंगे लेकिन यह विषय इतना आसान नहीं है इस पर या तो प्रदेश अपने संसाधनों का आंकलन करने के बाद निर्णय करे या फिर से केन्द्र इस पर निर्णय ले केवल कहने भर से बात बनने वाली नहीं है।
  4. कुल मिलाकर यहां यह कहना उचित होगा कि चुनाव के समय कोन सा मुद्दा हावी हो जाये और कौन से मुद्दे गौण हो जो यह  वक्त के अनुसार ही अपना असर दिखाते हैं ।
  5. क्योंकि हिमाचल में कर्मचारी अपना विशेष रोल अदा करता है इसलिए इस विषय को हल करना समय की आवश्यकता है।गणेश दत्त ।

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