जगदीप धनकड़ का इस्तीफा जितने मुंह उतनी बातें,उनका स्वयं का बयान मायिने रखता है,स्वास्थ्य कारणों से स्तीफा वाली बात में दम है कयोंकि गत समय में जगदीप धनकड़ की ऐन्जियो पालास्टी हुई है और जून महिने में नैनीताल प्रवास के दौरान वे बेहोश होकर गिर पड़े थे और हल्द्वानी के अस्पताल में वह उपचारधीन रहे,लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम घटित हुआ उसके पीछे कुछ और ही छुपा हुआ है।जगदीप धनकड़ का कार्यकाल 2027 तक का था लेकिन अल्पकाल में पद छोड़ने के कारण कई विवाद खड़े हो गये हैं जिस में सरकार से दूरी,विपक्ष के साथ मिलकर रहना मजबूरी बताई जा रही है।
उप-राष्ट्रपति का इस्तीफा एक पहेली बन गया है,जगदीप धनकड़ की बात मानी जाय या राजनैतिक गलियारों की बातों पर विश्वास किया जाय। जो भी हो जगदीप धनकड़ जहां भी रहे विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा,बंगाल में मुख्य मत्री ममता बैनर् से उनका 36 का आंकडा रहा है और राज्य सभा के उप-सभापति के तौर पर वे सारे विपक्ष के तारगेट पर रहे हैं लेकिन बिडम्बना देखिये उनके इस्तीफे के बाद पूरा विपक्ष उनका प्रेमी हो गया,अभी कुछ दिन उपराष्टपति जगदीप धनकड़ का इस्तीफा चर्चित रहेगा।
गणेश दत्त। 
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