नेपाल को नया नेतृत्व सुशीला कार्की के रूप में ,आग के शोलों को झेलता नेपाल स्थायित्व की तलाश में,नेपाल का सच्चा और ईमानदार सहयोगी केवल भारत ही हो सकता है,चीन ने नेपाल का शोषण किया है,हमेशा दबाने की कोशिश की है,अमेरिका चीन से दोस्ती के खिलाफ षडयंत्र रचता रहता है,नेपाल सहायता के अहसास पर चीन और अमेरिका का पिछलग्गू बना रहता है ,यह उसकी मजबूरी है,भारत और नेपाल के सम्बंध भावनात्मक रोटी बेटी के हैं और ये सम्बंध निश्चय ही दीर्घकालीन हैं ये सम्बंध कभी नहीं टूटने चाहिए।
हमारे पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में चार दिन तक चले हिंसा आगजनी और बबाल के बाद स्स्थिति अब नियंत्रण में है,काफी मंथन के बाद देश के प्रधान मंत्री के रूप में एक सुशिक्षित कानूनविद मिचोर सुशीला कार्की के रूप में तदर्थ आधार पर नया नेतृत्व मिला है,अगले 6 महिने के अंदर नेपाल में आमचुनाव होंगे,उसके बाद पता चलेगा कि कभी हिन्दू राष्ट्र होने वाला राष्ट्र किस ओर जाता है।
नेपाल एक गरीब राष्ट्र माना जाता है लेकिन वहां के शासक इस कदर अमीर और आलीशान हो गये कि वहां के युवाओं में उनकी हरकतें खटकने लगी हैं और वह विद्रोह का रूप धारण कर गई।
नेपाल चीन के काफी करीब आ गया,उसका कारण चीन की मदद नेपाल के लिए गले का फांस बनती गई,चीन के करीब आने के कारण अमेरिका भी नेपाल से खारखाये बैठा है,फलस्वरूप अभी हाल ही की घटनाओओं को अमेरिका के चीन प्रेम को नेपाल पर गिद्ध द्रष्टि पड़ी ऐसा समझा जाता है।
आने वाले समय में नेपाल किस ओर जाता है यह समय ही बतायेगा।लेकिन भारतीय व भारत ही नेपाल के सच्चे मित्र होंगे इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
गणेश दत्त।
Please Share This News By Pressing Whatsapp Button
