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पेपरलीक एक सामाजिक अपराध, लेकिन पेपरलीक का षडयंत्र कर लाखों युवाओं के भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ हो रहा है,सारे देश में नकल माफिया और पेपरलीक करने का षडयंत्र करने वालों पर नकेल कसने की आवश्यकता है,अभी हाल ही में उत्तराखंड में हुए तथाकथित पेपरलीक के कारण युवाओं का गुस्सा सड़क तक पहुँच गया,एक डेढ़ साल पहले भी षडयंत्र करने वालों ने सफल हुए अभ्यर्थियों को भी नौकरी से बंचित कर दिया,यह एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है,एक ओर सरकार को बदनाम करने और दूसरी ओर षडयंत्र करने वाले लाखों करोड़ों कमाना चाहते हैं,सरकार को ऐसे तत्वों को तारगेट कर उन पर नकेल कसने के लिए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, और अनावश्यक पेपरलीक के नाप पर परीक्षा रद्द करने के स्थान पर परीक्षा और परिणामों को समयबद्ध तरीके से सम्पन्न करने की योजना बनाना चाहिए।

उत्तराखंड में बार बार पेपरलीक की घटनायें माफिया गुटों की सोची समझी रणनीति का हिस्सा हैं,अपराधियों के बार बार षडयंत्र से युवा नौकरी से बंचित हो रहे हैं और सरकार की बदनामी हो रही है।इन्टरव्यू करने और सलेक्शन होने के बाद भी परीक्षायें रद्द की जा चुकी हैं,गत वर्ष व्लाक अधिकारियों के पदों पर सफल अभियर्थियों के दस्तावेज लेने के बावजूद भी नियुक्ति नहीं हो पाई और बाद में उसे रद्द कर दिया गया।
पेपरलीक का षडयंत्र कुछ अपराधियों की सोची समझी चाल है सरकार को ऐसे तत्वों को जेल की सलाखॅ में डालने का इन्तजाम करना चाहिए। और परीक्षा को और परिणामों को समयबद्ध करना चाहिए।
गणेश दत्त।

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