एकतरफ विदाई और और दूसरी तरफ स्वागत, हिमाचल में यह क्या खेल चल रहा है,आत्मसम्मान बेचने वाले सत्ता के पूत क्या हिमाचल का भला कर रहे हैं?या चांदी कूट रहे हैं यह बहुत ही चिंता का विषय है,हिमाचल के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ऐक्सटैंन्सन के बाद कल रिटायर हुए और कल ही बिजली बोर्ड के चेयरमैन बन गये,एक तरफ आदेश देने वाले पद पर थे अब आदेश लेने वाले पद पर बैठ गए, आखिर हिमाचल में यह क्या खेल चल रहा है ,ये सत्ता के पूत बिना पद के जिंदा नहीं रह सकते ?
हिमाचल प्रदेश में सत्ता के पूतों का यह कया खेल चल रहा है,मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना एक ओर रिटायर हो रहे हैं और दूसरी ओर एक बोर्ड का चेयरमैन बन रहे हैं,बड़े-आश्चर्य की बात है कि प्रबोध सक्सेना पहले ऐक्सटैंन्सन पर चल रहे थे और सेवानिवृत्त के बाद एक बोर्ड का चेयरमैन बन गये ,कया आपका कोई आत्मसम्मान नहीं बचा है?सत्ता की भूख और लोलुप्तता किस लिए पाली जा रही है क्या आपके पास जीवन जीने के लिए दाने नहीं बचे हैं।
मैं प्रबोध सक्सेना को बहुत पहले से जानता हूं मैं उनका सम्मान करता था लेकिन वह पद प्रतिष्ठा के लिए इतना गिर जायेंगे ऐसी उम्मीद नहीं थी,हिमाचल में इस प्रकार का जो खेल चल रहा है,पदों का शौदा हो रहा है यह बहुत ही चिंताजनक बात है।
गणेश दत्त। 
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