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बिहार चुनाव में एक बार फिर विपक्ष की परीक्षा,ताजा हालात पर नजर दौड़कर देखें तो NDA का वर्चस्व कायम है,महागठब॔धन की गाठें खुल नहीं रही हैं,कांग्रेस आर जे डी में अहम का टकराव चल रहा है,इस चुनाव की विशेष बात यह भी रहेगी कि जिस SIR के लिए, यानी वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के लिए कांग्रेस ने वोट चोर का नारा दिया था वह नारा कितनी बुरी तरह पिटेगा यह समय बतायेगा,14 नवंबर को बिहार की नई सरकार की तस्वीर सामने आ जायेगी,इस चुनाव में प्रधान मत्री की जनकल्याणी योजनाओं का चमत्कार भी देखा जा सकेगा,जिस प्रकार से महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है वह निश्चित ही चुनाव में परिणामों की तस्वीर साफ करेगा।

बिहार में विधान सभाशके चुनावों की तस्वीर लगभग साफ होती जा रही है,मुख्य मुकाबला NDA ,महागठब॔धन के बीच होना तय है,कांग्रेस और आर छे डी में अभी तक रस्सा कस्सी का खेल चल रहा है लेकिन एन डी ए में स्थिति साफ हो चुकी है।2005 के बाद वहां लालू राबड़ी को साफ तौर पर अपनी सरकार चलाने का अवसर नहीं मिला है,इसलिए सत्ता की भूख तो बहुत अधिक है।लेकिन लोग अब शायद ही लालू की पार्टी को अवसर देंगे ऐसी स॔भावना कम नजर आ रही है।
एक ओर लालू परिवार का भ्रष्टाचार और दूसरी तरफ प्रधान म॔त्री नरेंद्र मोदी और नितीश कुमार की साफ छवि इन चुनावों में अपना असर दिखायेंगे ऐसा होना निश्चित है।
14 नवंबर को बिहार में फिर एक बार नयी सरकार और नये कार्यक्रमों के साथ दिखाई देगी।
गणेश दत्त।

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