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मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर जी की चिंता जायज,हिमाचल की आर्थिकि को संबल प्रदान करने वाले सेब के बाजार में पड़ी ओले की मार ,पेटी के साथ बोरी वाले MIS के सेब के दाम गिरने से हिमफेड और एच पी एम सी को बहुत घाटा होगा।सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने की सख्त जरूरत।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिकि को बल प्रदान करने वाले सेब को इस बार ओले की मार के कारण बहुत बड़ा नुकसान होने की संभावना है, मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर ने सेब के दाम गिरने पर गहरी चिंता प्रकट की है और बागवानों से अपनी फसल को बाजार में लाने में थोड़ी सुस्ती लाने की बात की है,उन्होंने आशा प्रकट की है कि जल्दी ही सेब के दाम पटरी में आ जायेंगे।
हिमाचल प्रदेश में लगभग 600 करोड़ के सेब का व्यापार होता है।हिमाचल के सेब की सारे देश में एक अलग पहचान है,हिमाचल का सेब लम्बे समय तक जीवित रह सकता है जबकि अन्य प्रदेशों का सेब जल्दी सड़ जाता है और बाजार में इसका अच्छा दाम नहीं मिलता लेकिन हिमाचल का सेब हाथों हाथ बिक जाता है।
इस वर्ष अत्यधिक ओलाब्रिष्टि के कारण सेब में जगह जगह दाग पड़े हैं और उसका रूप बिगड़ा हुआ है फलस्वरूप बाजार में उसकी मांग कम हो गई है।एक सेब की पेटी को बाजार तक पहुंचाने में लगभग 450:00रू का खर्च आ जाता है लेकिन अभी बागवानों को मात्र 500, से 600रू तक ही मिल पा रहे हैं जिससे किसान बागवान की चिंता बढ़ गयी है।
हिमाचल में मंडी मध्यस्थता योजना के अनुसार सी ग्रेड का सेब सरकार की दो ऐजैन्सियां बागवानों से 9’50 प्रति किलो के रेट पर खरीदती हैं तथा वर्तमान समय में वह सेब बोरियों में आकर मण्डियों में खुली बोली के माध्यम से बेचा जाता है लेकिन वह मात्र 1:25 से 1:50 प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है इस प्रकार सरकार को 7:00 प्रति किलो का नुकसान हो रहा है। mis का सेब लगभग 60 से70 हजार मैट्रिक टन तक बिक्रि के लिए जाता है यदि यही हाल रहा तो सरकार को 50 करोड़ से अधिक का नुकसान हो सकता है,जिसका सीधा नुकसान सरकार की ऐजैन्सी हिमफेड वHPMC होगा। इसलिए सरकार को तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्यकता पड़ेगी।
मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर ने सेब के गिरते दामों पर चिंता प्रकट की है लेकिन यह च़िता ओला की मार से सेब के बिगड़े रूप दागों से अधिक है।सरकार को अधिक से अधिक प्रोसेसिंग की ओर जाना चाहिए। यद्यपि सरकार ने सेब के mis के लिए 3:50 पै प्रति किलो रखा है लेकिन रेट मात्र 1:25 से 1:50 प्रति किलो तक ही मिल पा रहे हैं जो बहुत कम हैं और बहुत ही घाटे की ओर सरकार की ऐजैन॔सियां जा रही हैं इसलिए घाटे को रोकने के लिए जिस रेट पर सेब बिक रहे हैं उसी रेट को कन्सीडर करना होगा तब जाकर सरकार की mIs का कार्य कर रही ऐजैन्सिंया बच पायेंगी।
गणेश दत्त।

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